150 किलोमीटर पैदल...सोचिए एक पल को, दिमाग सुन्न हो जाता है। छिल चुके छाले, गोद में बच्चों के सूखे चेहरे जो बहुत कुछ पूछना चाहते हैं पर शायद ही मां-बाप के पास कोई जवाब हो। कैसे बताया जाए कि मजदूर कितना मजबूर हो गया है। हर टूटते कदम के साथ भावनाएं उफन आती हैं। सैकड़ों किलोमीटर चलना है अभी, ऐसे में बच्चों से भी पिता कैसे कह दे कि थोड़ा पैदल चल लो...। बेबसी की ये 6 कहानियां आपको रुला देंगी।
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