Sunday, June 28, 2020

देखें, बिहार कैसे सच हुआ 90 साल का सपना

पटना/सुपौल: कोसी रेंज में लोगों का 90 साल पुराना सपना सच होने जा रहा है। 90 साल बाद कोसी नदी के ऊपर फिर से ट्रेन दौड़ने वाली है। रेल मंत्रालय ने 23 जून को नए पुल पर रेल चलाकर सफल परीक्षण भी कर लिया। रेल मंत्रालय ने इससे जुड़ा एक शानदार वीडियो भी जारी किया है। रेलवे ने लिखा है कि 'उत्तरी बिहार के दूरस्थ क्षेत्र के आम लोगों का लगभग 90 वर्ष पुराना सपना सच होने वाला है!' आपको बता दें कि 1934 में प्रयलंकारी भूकंप में पुल के ध्वस्त होने के बाद सुपौल से मधुबनी का संपर्क पूरी तरह से कट गया था। लेकिन इस नए पुल के तैयार होने से उत्तर भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ने के लिए वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। कोशी महासेतु होकर दिल्ली से गोरखपुर-सीतामढ़ी-दरभंगा-सकरी-निर्मली-सरायगढ़-फारबिसगंज के रास्ते पूर्वोत्तर भारत जाने के लिए एक छोटा रास्ता मिलेगा। वहीं सुपौल से अररिया गलगलिया के रास्ते न्यू जलपाईगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन आसानी से किया जा सकेगा। नवनिर्मित कोसी महासेतु से जल्द ही रेल परिचालन शुरू होने की उम्मीद है। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 6 जून 2003 को नए कोसी महासेतु के निर्माण के लिए शिलान्यास किया था। 1.9 किलोमीटर लंबे नए कोसी महासेतु सहित 22 किलोमीटर लंबे निर्मली-सरायगढ़ रेलखंड का निर्माण वर्ष 2003-04 में 323.41 करोड़ रुपयों की लागत से मंजूर किया गया था। ये भी एक तथ्य है कि कोसी नदी अपने स्थान को बदलने के लिए जग जाहिर है। जिस जगह पर नया पुल बनाया गया है यहां 1934 के समय से ही कोसी नदी नहीं बहती है। यह बिल्कुल नई लाइन और नया पुल है। 23 जून को रेलवे ने इस रेल ट्रैक पर एक स्पेशल ट्रेन चलाई जो सरायगढ़ से आसनपुर कुपहा तक गई।

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